ग़ज़ल-सहारा था सनम तेरा कभी हम को

सहारा था सनम तेरा कभी हम को,अकेले आज हो कर ढूंढते तुम को,,कभी सोचा न था दूरी बना लूंगा,मिटा दूँ कैसे इस नासूर से गम को,,खता करता रहा मैं हर घडी पल पल,हटा दूँ कैसे अब आँखों से इस नम को,,रही तू मेरी बन के हमनवां साया,मिटा पाया न खुद से मैं झूठे तम को,,नहीं काबिल क्षमा के मैं “मनी” तेरी,दुआ मेरी ख़ुशी हर एक मिले तुम को,,मनिंदर सिंह “मनी” 1222 1222 1222नोट :- एक ग़ज़ल आप सभी के समक्ष पेश है कोई कमी हो तो बताये जरूर……आपका सभी का धन्यवाद…..

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14 Comments

  1. sumit jain 02/01/2017
    • mani 03/01/2017
  2. Shishir "Madhukar" 02/01/2017
    • mani 03/01/2017
  3. ANU MAHESHWARI 03/01/2017
    • mani 03/01/2017
  4. babucm 03/01/2017
  5. mani 03/01/2017
    • babucm 03/01/2017
  6. Madhu tiwari 03/01/2017
  7. निवातियाँ डी. के. 03/01/2017
  8. Meena Bhardwaj 04/01/2017
    • mani 05/01/2017

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