अंकुर फूटेगा एक दिन पुनः

इस निराश से भरे जीवन मेंअशान्त से भरे मन मेंअनुभूति है सुख-दुःखजन्म-मरण के चक्र मेंमानव की मानवताखो गई है कदाचित भीड़ मेंअंकुर फूटेगा जिसका पुनः एक दिनशेष है बीज अभी भी उसकाहोगा मानव जीवन हरा भरायह विश्वास है कवि कोजीवन में चारो औरसिर्फ प्रेम है और केवल प्रेम हैप्रेम न तो व्यापर हैन ही इर्ष्या और स्वार्थप्रेम तो है निश्छल और नि:स्वार्थप्रेम का एक ही नियम हैप्रेम… प्रेम… प्रेम…!अंकुर फूटेगा एक दिन पुनःक्योंकि यही जिंदगी कानियम हैं।कर तू जिंदगी से प्यारस्वयं पर कर यकीनसुन्दर है, साहस है जीवनउमंग है, अभिव्यक्ति है जीवननहीं है जीवन अशुभकर युद्ध उससेसफलता ही मिल जाएगायथार्थ में, जीवन ही आनंद हैआनंद ही ईश्वर हैअंकुर फूटेगा एक दिन पुनःआनंद काजीवन होगा सुन्दर नोट :- इस कविता में कोई कमी हो बताये जरूर……आपका सभी का धन्यवाद…

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7 Comments

  1. mani 02/01/2017
  2. babucm 03/01/2017
    • sumit jain 03/01/2017
      • babucm 03/01/2017
  3. Madhu tiwari 03/01/2017
  4. निवातियाँ डी. के. 03/01/2017

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