हाल-ए-दिल अपना…सी.एम् शर्मा (बब्बू)….

हाल-ए-दिल हमसे अपना, सुनाया न गया….दर्द सोया था जो मुश्किल से, जगाया न गया…हर वफ़ा जुर्म हो दुनिया में मुमकिन है कहाँ….दिल से हर वक़्त तुझे मुझसे, भुलाया न गया….फलक फलक था भटका मैं उम्मीद लिए…दिल किसी का मगर मुझसे, लुभाया  न गया….है कलम हाथ में और दर्द भरी आँखें मेरी….अश्कों को हर्फ़े जुबां मुझसे, बनाया न गया….ज़िन्दगी मेरी रही मुझसे खफा उम्र भर ‘चन्दर’…तेरी उम्मीद में मौत अपनी को, बुलाया न गया…\/सी.एम् शर्मा (बब्बू)हर्फ़       –      लफ्ज़, शब्द

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16 Comments

    • babucm 02/01/2017
  1. कृष्ण सैनी 31/12/2016
    • babucm 02/01/2017
  2. Meena Bhardwaj 31/12/2016
    • babucm 02/01/2017
  3. Madhu tiwari 31/12/2016
    • babucm 02/01/2017
  4. ANU MAHESHWARI 31/12/2016
    • babucm 02/01/2017
  5. Shishir "Madhukar" 01/01/2017
    • babucm 02/01/2017
  6. डॉ. विवेक 01/01/2017
    • babucm 02/01/2017
  7. निवातियाँ डी. के. 03/01/2017
    • babucm 03/01/2017

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