चाशनी सी गज़ल,,,,,

नग़मे कई प्यार के मैंने तुझे हैं सुनाये सनमतू भी कभी सुना दे मुझे प्यार की एक कोई चाशनी सी ग़ज़लनग़मे कई ,,,,,मेरी कल्पनाओं में रंग तुझसे हैंमेरी भावनाओं में शब्द तुझसे हैंथामकर कभी हाथ मेरा सनमतू भी छू ले कभी इन हवाओं के परपलकों पर हैं मेरी ठहरी नदियाँ कईबूँद एक ,आँखों में तुम भी अपनी भरो गंगाजलनग़मे कई प्यार के मैंने तुझे हैं सुनाये सनमतू भी कभी सुना दे मुझे प्यार की एक कोई चाशनी सी ग़ज़लनग़मे कई ,,,,,हर सफ़र में तेरे हमसफ़र की तरह चल रही मैं तेरे संग इक डगर की तरहसाथ मेरे कभी तू जो चले ऐ ! सनम तुझको दिखने लगेंगे सपनों के नगरदिल में है प्यार का आशियाना मेरे तू भी दिल में कभी बना,प्यार का एक महलनग़मे कई प्यार के मैंने तुझे हैं सुनाये सनमतू भी कभी सुना दे मुझे प्यार की एक कोई चाशनी सी ग़ज़लनग़मे कई ,,,,,सीमा “अपराजिता “

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13 Comments

  1. कृष्ण सैनी 30/12/2016
    • सीमा वर्मा 01/01/2017
  2. babucm 30/12/2016
    • सीमा वर्मा 01/01/2017
  3. Madhu tiwari 30/12/2016
    • सीमा वर्मा 01/01/2017
  4. Shishir "Madhukar" 30/12/2016
    • सीमा वर्मा 01/01/2017
    • सीमा वर्मा 01/01/2017
  5. निवातियाँ डी. के. 30/12/2016
    • सीमा वर्मा 01/01/2017
  6. Bindeshwar prasad sharma 07/04/2018

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