महफ़िल—-मनिंदर सिंह “मनी”

जब भी तेरी महफ़िल सजतीबात वहाँ बस मेरी चलती।।मेरी कमी तुझे अब खलतीयाद शूल बन हरपल चुभती।।हँसना तेरा झूठा लगतागम तेरे होठो पर सजता।निश दिन हल्ला दिल में मचता,तू पाने को मुझे मचलता।। भूल न सका किये जो वादे,जेहन में बस तेरी यादे।।बिना नींद के कटती रातेंयाद दिलाती तेरी बातें।।बना बहाने मिलना तेराबार बार नजरो का घेरा।।धीरे से तेरा इतरानादेख मुझे हसना मुश्काना।।होगी कोई तो मजबूरीबनी तभी अपनी ये दूरी।।जग सारा वाह वाह करतागवाही प्रेम की है भरता।। मनिंदर सिंह “मनी”नोट:- आप सभी गुणीजनों से अनुरोध है की मैंने १६-१६ से चोपाई छंद लिखने की कोशिश की है…..एक बार देख कर बताये में कामयाब हुआ के नहीं……धन्यवाद आप सभी का….

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14 Comments

  1. कृष्ण सैनी 30/12/2016
    • mani 30/12/2016
  2. babucm 30/12/2016
    • mani 30/12/2016
  3. Madhu tiwari 30/12/2016
    • mani 30/12/2016
  4. Meena Bhardwaj 30/12/2016
  5. mani 30/12/2016
  6. Shishir "Madhukar" 30/12/2016
    • mani 03/01/2017
    • mani 03/01/2017
  7. निवातियाँ डी. के. 30/12/2016
    • mani 03/01/2017

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