नया गीत लिखूंगी—मधु तिवारी

नया साल मे नई उमंग,मन मे उठा है नई तरंगइसी खुशी की रीत लिखूंगीआज नया कोई गीत लिखूंगीसागर, झरने ,पेड़ ,पहाड़चंचल नदिया, शेर दहाड़प्रेम सरस मन मीत लिखूंगीआज नया कोई गीत लिखूंगीकल-कल नदिया बहती है, अपनी कहानी कहती है रुकती नहीं है धारा उसकी,आगे सदा ही बढ़ती हैउसका संघर्ष औऱ जीत लिखूंगी आज नया कोई गीत लिखूंगीहै अथाह सागर गंभीर, रत्नों से भरा हुआ है नीरचंचलता कर खुद मे समाहित, शांत सदा अचल औ धीरसुभाव है सुन्दर शीत लिखूंगीआज नया कोई गीत लिखूंगीहै अविचल शांत और मौन,पर्वत का गुण जाने न कौनकितने जलद टकराये बरसे, कितने झकैरे झंझा पौनकष्टों से उसका प्रीत लिखूगीआज नया कोई गीत लिखूगी ———कवयित्री– मधु तिवारी

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21 Comments

  1. Savita Verma 29/12/2016
  2. Abhishek Rajhans 29/12/2016
  3. babucm 29/12/2016
  4. Madhu tiwari 29/12/2016
  5. ANU MAHESHWARI 29/12/2016
  6. mani 29/12/2016
  7. krishan saini 29/12/2016
    • Madhu tiwari 29/12/2016
  8. निवातियाँ डी. के. 29/12/2016
  9. Madhu tiwari 29/12/2016
  10. Shishir "Madhukar" 29/12/2016
  11. Meena Bhardwaj 30/12/2016

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