अंजाम-1…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)……

दर्दे इश्क़ में यूं मेरे, जज़्बात हो पड़े….बेख्याल बेवजह, दिल है की रो पड़े….हर्फो हया से दोस्ती, महंगी पड़ी हमें…जज़्बा-ऐ-इश्क़ खुद के, हम कैद हो पड़े…इश्क़ जुनूँ में उड़ रहे थे, आसमान पे हम….ठोकर लगी जो वक़्त की, ज़मींदोज़ हो पड़े…इस रंज से विदा किया, तूने जहाँ से हमें….दुश्मन भी जिसको देख के, हो बेबस रो पड़े….इस कदर होगी हंसी, क्या मौत कभी ‘चन्दर’छूआ जो तूने ज़ख्मो को, लगा कँवल खिल हो पड़े…\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…(पूर्व में प्रकाशित को सुधार करके आपकी नज़रे कर्म हेतु…..)

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18 Comments

  1. Madhu tiwari 29/12/2016
    • babucm 30/12/2016
  2. Savita Verma 29/12/2016
    • babucm 30/12/2016
  3. ANU MAHESHWARI 29/12/2016
    • babucm 30/12/2016
  4. mani 29/12/2016
    • babucm 30/12/2016
  5. krishan saini 29/12/2016
    • babucm 30/12/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 29/12/2016
    • babucm 30/12/2016
  7. Shishir "Madhukar" 29/12/2016
    • babucm 30/12/2016
  8. Meena Bhardwaj 30/12/2016
    • babucm 31/12/2016
    • babucm 31/12/2016

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