Bhagavan To Chuti Per Hai

उथल पुथल मचगी संसार माहनिर्धन तबाह होगए, आमिर आबाद होगएबजार होगया महंगा, कोई चीज न मिली सस्तीअसली बचा न कोय, नकली का बोलबाला  आमिर होगये चोर उचके, ईमानदार मर रहा भूखामिलावट की माया देखो, सब पापी हो गएबेरोजगारी ने सर उठालिया, पढ़े लिखे बेकार फिरेधर्म के ठेकेदार बन गए पापी, कौन विश्वास केरेआमिर और आमिर, गरीब और गरीब होगयाहिंसा का बोलबाला है, अधर्म चरम सीमा पर मनुष्य दुखी है, भटक रहा है सुख के लिए जन्म तो ले लिया, मानव नही बन पाएमशीनों ने ले ली जगह भगवान की

बुरे फस गए है…………………..

दुनिया अजब गजब सी होगी  कहीं भगवान छुट्टी पर तो नहीं है………. छुट्टी परतो हम है…..किसी न किसी बहाने से…..यह भ्रम हम ने पला हैयह सोच हमारी हैचोला बुराई का हम ने पहना है हम बुरा देख-सुन-बोल रहे हैहमें ही छुट्टी से आना होंगाहमे बदलना होगा सिस्टम कोहमे मशाल उठानी होगी हमें चल न होगा सत्य की राह परहमे करनी है स्थपना नए युग कीहमे  करनी है  स्थपना धर्म की…..भगवान ना कर्ता है, ना धर्ता हैवो तो लीन है अपने स्वरूप मेंवो तो केवल ज्ञाता द्रष्टा हैक्यों की भगवान छुट्टी पर होते नहीं ….

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7 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 28/12/2016
  2. babucm 29/12/2016
    • sumit jain 29/12/2016
      • sumit jain 29/12/2016
  3. Madhu tiwari 29/12/2016
  4. mani 29/12/2016

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