इस “मैं” को समझाऊँ क्या….सी.एम्. शर्मा (बब्बू) ….

तुझ बिन रात और दिन है क्या…तुझ को मैं समझाऊँ क्या…स्याह रात दिल की तन्हाई…अपने को समझाऊँ क्या….दर्द है मेरा जिगर भी मेरा…तुम को मैं दिखलाऊँ क्या….दिल की इबारत मैं अनपढ़ सा…तुमको मैं जतलाऊँ क्या…दिन में तारे रात अकेली…दुनिया को समझाऊँ क्या…..प्यार ही जीवन जीवन ही प्यार है…वाईसों को समझाऊँ क्या…“बब्बू” है पर तुम नहीं हो…इस “मैं” को समझाऊँ क्या…\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)वाईस – उपदेशक

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10 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 26/12/2016
    • babucm 27/12/2016
  2. ANU MAHESHWARI 26/12/2016
    • babucm 27/12/2016
  3. Shishir "Madhukar" 26/12/2016
    • babucm 27/12/2016
  4. Madhu tiwari 27/12/2016
    • babucm 27/12/2016
  5. Meena Bhardwaj 28/12/2016
    • babucm 29/12/2016

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