बन्धन – शिशिर मधुकर

वो बन्धन जिनमें प्रेम ना हो होते हैं जहरीले तोड़े बिन उन सबको यहाँ कैसे कोई जी लेअन्दर छुपी हस्ती से ही तो आती है सुंदरता झूठे फरेबी होते हैं कुछ लोग यहाँ चमकीलेवैसे कोई कमी नहीँ है इस आब ए समुन्दर में मीठा पानी ना हो तो किस काम में आए झीलें जो रहते हैं आबाद सदा इन पेड़ों के सायों मेंबनते नहीँ भूमि के वो टुकडे सूखे रेतीले टीले हर कोई संसार में शिव नहीँ बन पाता मधुकर जो हँसते हुए खुद से ही सारे ज़हर को पी लेशिशिर मधुकर

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

17 Comments

  1. babucm 23/12/2016
  2. Bhola Shankar singh 23/12/2016
  3. Shishir "Madhukar" 23/12/2016
  4. babucm 23/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/12/2016
  5. ANU MAHESHWARI 23/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/12/2016
  6. Meena Bhardwaj 23/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/12/2016
  7. Madhu tiwari 23/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/12/2016
  8. निवातियाँ डी. के. 23/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/12/2016
      • निवातियाँ डी. के. 23/12/2016
        • Shishir 23/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 24/12/2016

Leave a Reply