प्रीत की रीत निराली है….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….

प्रीत की रीत निराली है….हर दिन दिल में दिवाली है…..प्रीत की रीत निराली है….रात अँधेरी सुनहरी लगती..तपती धूप मतवाली है…..प्रीत की रीत निराली है….इश्क़ समंदर पी पी बैठे…फिर भी कहे दिल खाली है….प्रीत की रीत निराली है….रोज़ ही गाये रोज़ सुनाये….एक ही सुर इक ताली है….प्रीत की रीत निराली है….महका है जिससे हर पल ही..वो ‘चन्दर’ दिल की वाली है…..प्रीत की रीत निराली है….\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)….वाली – मालिक

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12 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 20/12/2016
    • babucm 21/12/2016
  2. mani 20/12/2016
    • babucm 21/12/2016
  3. Shishir "Madhukar" 20/12/2016
    • babucm 21/12/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 20/12/2016
    • babucm 21/12/2016
  5. Meena Bhardwaj 20/12/2016
    • babucm 21/12/2016
    • babucm 23/12/2016

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