काश पढ़ सकती मै चेहरा – अनु महेश्वरी

कभी कभी सोचती हूँकाश यह मुमकीन होतापढ़ सकती मै लोगो के चेहरेतो कितना अच्छा होता।सब की मन की बातजान लेती मैअच्छी तरह सबकोपहचान लेती मैं।फिर कभी कभी दिल मेंयह ख्याल भी आता हैमुमकिन नहीं चेहरे पढ़नासायद यही अच्छा है।मन के अंदर क्या चल रहाअगर यह समझ लेतीसायद एक अनचाही अन्तर्कलहजैसी स्थिति जनम लेती।कुछ बाते कभी कभीबुरी हो या अच्छीएक दूसरे से रहे छीपीशांति बनी रहती तभी। अनु महेश्वरीचेन्नई

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12 Comments

  1. Madhu tiwari 17/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 17/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" 17/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 17/12/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 17/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 17/12/2016
  4. babucm 17/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 17/12/2016
  5. Meena Bhardwaj 19/12/2016
  6. ANU MAHESHWARI 19/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 19/12/2016

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