सौगात —डी. के. निवातिया

आयी फिर याद भूली बात की तरह !गुजरी है लश्कर-ऐ-बारात की तरह !!!कितने बदल गये यार सब अपनेवक़्त – बेवक़्त हालात की तरह !!कभी मिल जाते, मेघ से उमड़तेअचानक हुई बरसात की तरह !!देखती है आँखे, कोई ख्वाब सावो गुजर जाते है रात की तरह !!इसे जफ़ा कहे या उनकी इनायतगम भी मिले है सौगात की तरह !!!!!डी. के. निवातिया[email protected]

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10 Comments

  1. Madhu tiwari 14/12/2016
  2. mani 14/12/2016
  3. ANU MAHESHWARI 14/12/2016
  4. Shishir "Madhukar" 14/12/2016
  5. vivekbijnori 14/12/2016
  6. babucm 14/12/2016
  7. M Sarvadnya 14/12/2016
  8. Meena Bhardwaj 15/12/2016
  9. आलोक पान्डेय 16/12/2016

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