मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -३ अंक ३ ,दिसम्बर २०१६ में प्रकाशित

jaivijay-dec2016प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -३ , अंक ३ ,दिसम्बर २०१६ में प्रकाशितहुयी है . आप भी अपनी प्रतिक्रिया से अबगत कराएँ .dec-2016-jai-vijay-aउनको तो हमसे प्यार है ये कल की बात हैकायम ये ऐतबार था ये कल की बात हैजब से मिली नज़र तो चलता नहीं है बसमुझे दिल पर अख्तियार था ये कल की बात हैअब फूल भी खिलने लगा है निगाहों मेंकाँटों से मुझको प्यार था ये कल की बात हैअब जिनकी बेबफ़ाई के चर्चे हैं हर तरफबह पहले बफादार थे ये कल की बात हैजिसने लगायी आग मेरे घर में आकर केबह शख्श मेरा यार था ये कल की बात हैतन्हाईयों का गम ,जो मुझे दे दिया उन्होनेंबह मेरा गम बेशुमार था ये कल की बात हैमदन मोहन सक्सेना

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5 Comments

  1. M Sarvadnya 14/12/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 14/12/2016
  3. mani 14/12/2016
  4. babucm 14/12/2016

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