गीत-चली रे चली पुरवईया-मनिंदर सिंह “मनी”

चली रे चली पुरवईया,चली रे चली पुरवईया,सही ना जाये, दूरी तुझ से,छोड़ सनम, तू आज सेवईया,चली रे चली पुरवईया,चली रे चली पुरवईया,काहे उम्र बितावे बिन प्रेम के,आ के, भर ले बाँहों में सईया,चली रे चली पुरवईया,चली रे चली पुरवईया,हँसे चौखट, देखु जब राह तेरी,कु कु कर चिढ़ावे कोइलिया,चली रे चली पुरवईया,चली रे चली पुरवईया,जलावे तन को, ठंडी ठंडी पवन,लगी इस आग को, बुझा दे सईया,चली रे चली पुरवईया,चली रे चली पुरवईया,मनिंदर सिंह “मनी”

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10 Comments

  1. M Sarvadnya 14/12/2016
  2. mani 14/12/2016
  3. Shishir "Madhukar" 14/12/2016
  4. mani 14/12/2016
  5. babucm 14/12/2016
  6. mani 14/12/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 14/12/2016
  8. mani 14/12/2016
    • mani 17/12/2016

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