आख़िरी उम्मीद

raaapppअभी कुछ और जीना था मुझेकुछ मनचाहा करना था मुझे अभी तो बस मंजिल का पता थाइन आँखों में भी एक सपना थारास्तों पर भी तो चलना था मुझेचल पड़ी रास्तों पर बिन सोचे समझेशायद मंज़िल मेरी किस्मत में न थीरास्ता तो मिला मगर छिन गयाइस तरह की अँधियारा-ही-अँधियारा थाचलते -2 मौत ने ना जानेक्यों इस कदर पकड़ा मुझेकि अपना गुलाम बना लियाचाहत थी मेरी और जीने कीएक स्वप्न था इन सोती आँखों मेंकुछ देखने कुछ करने काशायद तभी लड़ रही थी मौत सेआखिरी सांस तकमौत ना आती मेरे करीब अगरउनमे इंसानियत कुछ रह जातीमौत के आगोश में इस तरह तो ना जातीमांग रही थी भीख ज़िन्दगी कीछोड़ दो मुझे अब जाना हैकर रहा इंतज़ार कोई बस मुझे अब जाना हैना सुनी, मेरी पुकार कर दिया मुझे तार-2आहत हुआ ह्रदय मेराचीख उठा जर्रा जर्राना किया मुझमे रहमदे दिए अनेकों ज़ख़्ममकसद ना उनका जान पायीचीखती – चिल्लाती रहीना पहुची चीख मेरी उन तकज़ख्म पर ज़ख्म देते रहेखेल रहे थे संग मेरेजैसे हूँ कठपुतली कोईछीन ली सांसे मेरीखेल – खेल मेंठोकर दी मुझे इस तरहना संभल पायी थीआँखे बंद हो रही अबएक उम्मीद सी दिल में छायी थीजब मौत करीब मेरे आयी थी ।।

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10 Comments

  1. sneha 13/12/2016
    • gokul72525 13/12/2016
  2. M Sarvadnya 13/12/2016
    • gokul72525 15/12/2016
  3. babucm 14/12/2016
    • gokul72525 15/12/2016
  4. ANU MAHESHWARI 14/12/2016
    • gokul72525 15/12/2016
  5. rohit manral 16/12/2016
  6. saurabh gangwar 08/05/2017

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