आवारा कुत्ते ..

दफ़्तर से देर रात जब घर को जाता हूँचन्द कदमो के फ़ासले मे खो जाता हूँसुनसान सी राहे, ना कोई कदमो के निशाट्यूब लाइट की रोशनी, ना कोई कहकहाकुछ अरमान जागते है सुबह मेरे जागने के साथरात को पाता हूँ, उन सब का दम निकलाज़िल्लती, गोशानशीनी का एहसास कराने था वो खड़ामै अंदर से सहमा-सहमा पर बाहर से अड़ा||मुझको नाशाद-ओ-नकारा समझ समझ रात को टोकाकल कुछ आवारा कुत्तो ने मुझ पर भौंकामुझे खुद से बात करते पाया होगा, आधी रात कोसमाज का दुतकारा हुआ,या बदलने मेरी जात कोमैं अनायास सोचने लगा….आवारा कुत्ते तो हैं, जिन्हे मेरे वजूद का एहसास हैकोई देखे ना देखे, पर गवाह धरती और आकाश हैकुत्तो के अलावा किसको किसी की इतनी परवाह हैअनजानो की खातिर, क्या इंसान रातो को जगा हैइंसान अपने ही घर भी निडर कहाँ रहता हैजिसे अपना कहे, अपने कहाँ? किसको अपना कहता हैमुझे क़ैद कर देती दीवारो मे, चन्द पानी की बूंदेकुत्तो को रोके, कहाँ बदनीयत बारिश, सर्द हवा है?चन्द हैं इलाक़े मे, फिर भी गलियो मे निर्भीक घूमते हैअपना समझते है जिसको भी, बस उन्हे चूमते हैमेरी गली से, संसद की गलियो तक कुत्तो का शोर हैहर एक इलाक़े मे यहाँ कोई कुत्ता ही सिरमौर हैपर भौंक–भौंक कर ये सब, क्या कुछ नया कर पाएँगेकुत्ते हैं, एक ना एक दिन ,कुत्ते की मौत मर जाएँगे ||

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

8 Comments

    • shivdutt 27/03/2017
  1. babucm 09/12/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 09/12/2016
  3. Shishir "Madhukar" 09/12/2016

Leave a Reply