आशा-1…सी. एम्. शर्मा (बब्बू)…

आशा…..हम में ही निहित है…जन्म से…प्रकिर्ति में निहित है हमारे चारों तरफ…यत पिण्डे तत ब्रह्मांडे…जो भीतर है वही तो बाहर है….रोज़ ही फूल पौधे मुरझाते हैं…मर जाते हैं…नए और पैदा होते हैं….इंसान रोज़ मर रहे हैं…जन्म हो रहा है…निश्चित है जैसे जाना उसका जो आया है…वैसे ही नया जन्म होना भी निश्चित है..हम इसे परिवर्तन भी कह सकते….सोचो दोनों में से एक रुक जाए…जन्म या मौत…तो क्या हो…सब कुछ वहीँ स्थिर…न कोई मरेगा…न जीएगा…प्रताड़ित होंगे अपने आप से…ज़िन्दगी का आनंद ही ख़तम हो जाएगा….जब मरने जीने का …दुःख सुख का…परिवर्तन नहीं होगा….जब सुख का परिवर्तन दुःख में होता है….तो दुःख अपर्वर्तिनीय हो ही नहीं सकता…जीवन चल रहा है…रुक नहीं रहा…फिर भी….हम अपने अंदर…आशा को नहीं देख पा रहे…छोटा सा बचा जो घुटनो पे रेंग रहा है….उसको आशा है खड़ा हो जाऊँगा…प्रकिर्ति सिखाती है उसे…कोई नहीं सिखाता…भले माँ बाप सब कहें हम सीखा रहे…सब झूट…वो अपने आप खड़ा होता है…क्यूंकि उसे जन्म से मिली है….आशा की प्रविर्ती….अंदर है हमारे…जन्म से ही…जब तक आत्मा शरीर में है…आशा भी उसी के साथ है…आशा ले के पैदा हुए हैं हम….इसी आशा के बल पे जीते हैं…आशा….\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

10 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 07/12/2016
    • babucm 08/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" 07/12/2016
    • babucm 08/12/2016
    • babucm 08/12/2016
  3. Meena Bhardwaj 07/12/2016
    • babucm 08/12/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 07/12/2016
    • babucm 08/12/2016

Leave a Reply