“अधूरी कविता”

एक अधूरी कविता,सोचा कल पूरी करुंगी
अधूरी इसलिए कि भाव और विचार
आए और चले गए , कल ही की तरह
कल का क्या ? आज के बाद
रोज ही आता है और रोज ही जाता है
कल कभी आया नही और
कविता पूरी हुई नही
मन की बातें…, पन्नों पर बेतरतीब सी
टेढ़ी-मेढ़ी विथियों की तरह
अक्सर मुँह चिढ़ाती हैं तो कभी
सम्पूर्णता हेतु अनुनय करती हैं
मगर क्या करुं….?
दिल आजकल दिमाग का काम करने लगा है
कोमलता की बातें भूल बस
समझ -बूझ की हठ करने लगा है .
×××××
“मीना भारद्वाज”

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12 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 06/12/2016
    • Meena Bhardwaj 07/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" 06/12/2016
  3. Meena Bhardwaj 07/12/2016
  4. babucm 07/12/2016
  5. Meena Bhardwaj 07/12/2016
  6. Meena Bhardwaj 07/12/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 07/12/2016
  8. Meena Bhardwaj 07/12/2016
  9. ALKA 24/03/2017
  10. Meena Bhardwaj 24/03/2017

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