चिराग –मधु तिवारी

आजफिर एक चिराग बूझ गयाआज सूरज फिर पश्चिम मे डूब गयाऐसा नहीं है अब कुछ न होगा फिरपुनः आने को आतुर वह खूब गयाफिर जलेगा एक नया चिराग यहाँउदय हो सूरज रोशन करेगा जहाँपरिवर्तन रूचिकर है नियति कोवरना जग को फिर चैन कहा ँजो आया है वो निश्चित ही जायेगाजो बोया है वो निश्चित ही पायेगाकर्म ही बडा होता है जग मेबाकी सब मिट्टी मे मिल जायेगाअंत मिट्टी मे मिल जाना हैसबका अंतिम वही ठिकाना हैपेड़ गया है आज अगर तोकल अंकुर बनके आना है।

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13 Comments

  1. mani 06/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" 06/12/2016
  3. ANU MAHESHWARI 06/12/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 06/12/2016
  5. babucm 06/12/2016
  6. Bhawana Kumari 16/07/2017

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