अफ़सोस ——डी. के. निवातिया

लुटाकर हर ख़ुशी उम्र भर रो सकता हूँ मैंएक सिर्फ तुझे हँसाने के लिये ,अश्को के सागर में खुद को बहा सकता हूँ मैंतेरे कपोलो के गुल खिलाने के लिये,हवाओ के बेबस झोंको से उलझ सकता हूँ मैंतेरे गेसुओं की लट सुलझाने के लिये,!मगर अफ़सोस ये है की………….!!जमाने भर की खुशियां कम पड़ जाती हैएक तेरे दिये गम मिटाने के लिये !!!!डी. के. निवातिया[email protected]

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14 Comments

  1. Meena Bhardwaj 07/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/12/2016
  2. ANU MAHESHWARI 07/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/12/2016
  3. babucm 07/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/12/2016
  4. Shishir "Madhukar" 08/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/12/2016
  5. Savita Verma 08/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/12/2016
  6. M Sarvadnya 11/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 13/12/2016

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