जीना नहीं आता – शिशिर मधुकर

जाम होता हैं कुछ के सामने पर पीना नहीं आता कुसुम को रौँदने वाले को कभी जीना नहीं आताहीरे तो मिल जाते हैं अक्सर जीवन की राहों में सबकी कीमत बताने को मगर जौहरी नहीं आताउसके सम्मान की खातिर ज़माने से लड़ा मैं भी ना जाने कौन से जन्मों का उससे था मेरा नाता जीवन के सफर में वैसे तो कई मौसम बदलते हैं पर हर इंसान को हर ईक मौसम तो नहीं भाताअपने वादों को भुलाना मेरी फितरत में ही नहीं वरना अपमान सह कर यूँ मैं कसमें ना निभाताशिशिर मधुकर

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12 Comments

  1. Madhu tiwari 05/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/12/2016
  2. mani 05/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/12/2016
  3. ANU MAHESHWARI 05/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/12/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 05/12/2016
    • Shishir "Madhukar" 05/12/2016
  5. babucm 05/12/2016
  6. Shishir "Madhukar" 06/12/2016
  7. Shishir "Madhukar" 06/12/2016

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