खुशियों की तलाश – अनु महेश्वरी

खुशियों की तलाश मेंसब भटक रहे इधर उधरपास जो है अपनेउसकी न है कोई कदरदेखो जिधर भीपरेशान है सभीकिसी को धन न होने कीकिसी को धन छुपाने कीजिसके पास परिवार हैउसे अकेलापन चाहिएजो अकेला हैउसे परिवार चाहिएवजह क्या है इसकीकुछ समझ नहीं आतीबंद आँखों सेखुशियाँ कहाँ मिल पातीजब तक समझेगा इंसान यहडर बस यही हैतब तक इतनी देर न हो जाएकी वह वापस लौट ही न पाएढूंढ़ने से खुशियाँ मिलती कहाँखुश रहना सीखना पड़ता यहाँसच्ची हो आस्था अगरपत्थर में भी भगवान आते नज़र। “अनु महेश्वरी”चेन्नई

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12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 04/12/2016
  2. ANU MAHESHWARI 04/12/2016
  3. babucm 04/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 04/12/2016
  4. Manjusha 04/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 04/12/2016
  5. mani 05/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 06/12/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 05/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 06/12/2016
    • ANU MAHESHWARI 06/12/2016

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