गौरैया–मधु तिवारी

हुआ करता था पहलेमिट्टी छप्पर का घरठंडा सुकुन भरावहाँ आती थी गौरैया अनगिनतचींचीं-चूचू का गीतसुना करते थे दिनभरघर में अकेले रहने पर भीन होता था भासअकेलेपन का घोंसले से झाकते नन्हेदाना लाते मुँह भर भर करडालते उनके चोंच में मात पितावात्सल्य का अनुठा दृश्य अब दुर्लभ हो गया है लगता था यह चिर संगिनी हैजो हमसे कभी विलग न होगीअब ईंट कंकृट पत्थर से बने घर सर्व सुविधा युक्त परिंदा भी पर न मार सके चाकचौबंद मकानेंगिने चुने लोग उस घर मेंनियति से कोसों दूरशीतलता उष्णता सबकृत्रिम औऱ बनावटीजहाँ ईंट पत्थर से लोगवैसे ही रिश्ते ,मशीन से चलतेकिसी को किसी के लिए फुर्सत नहींयहां गौरैया के लिए जगह कहांउनका जीवन कठिन हो गया हैसर्घष से पूर्ण दाना पानी जुटाने करना पडता है मसक्कतइसलिए वो हमसे दूर हो गईइतना कि उसे गिन सकेआओ उनकी ओर कदम बढायेउनको उनका हक दिलाएं अपनी चिर संगिनी को वापस लाए रूठी गौरेया को मनाए

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

14 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 03/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" 03/12/2016
  3. babucm 03/12/2016
  4. babucm 03/12/2016
    • Madhu tiwari 03/12/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 03/12/2016
  6. Manjusha 04/12/2016
  7. mani 05/12/2016

Leave a Reply