क्यों… (मुअद्दस मुसल्सल ग़ज़ल)

मुअद्दस मुसल्सल ग़ज़ल  माना के बदलाव के लिये बदलाव का होना जरुरी है !पर क्यों इसमें आमजन को ही फ़ना होना जरूरी है !!!क्यों नही जलते शोलो में हाथ आग लगाने वालो के !क्यों हरबार किसान मजदूर को जान खोना जरुरी है !!!धनपति उड़ा रहे नोट कागज़ की माफिक शादियों मेंक्यों गरीब की बेटी को ही सन्ताप में रोना जरुरी है !!!नहीं देखा किसी ख़ास वर्ग को मुफलिसी में जीते हुए !क्यों तुझे और मुझे ही कतार में खड़ा होना जरुरी है !!!इरादा नही “धर्म” का दोष दे किसी को सुकर्म के लियेबस इल्तिज़ा ये,भागीदारी सबकी “सम” होना जरुरी है !!!!!डी. के. निवातिया _________!!!

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 03/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 06/12/2016
  2. babucm 03/12/2016
    • babucm 03/12/2016
      • निवातियाँ डी. के. 06/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 06/12/2016
  3. ANU MAHESHWARI 03/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 06/12/2016
    • निवातियाँ डी. के. 06/12/2016

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