अगर… (विवेक बिजनोरी)

“सब जानते हैं मैं नशा नहीं करता,मगर पी लेता अगर तू शराब होतीकिताबों से मेरा तालुक़ नहीं रहा कबसे,मगर फुरसत से पढ़ता अगर तू किताब होतीख्वाब तक आते नहीं मुझको नींद में,पर बुलाया करता अगर तू ख्वाब होतीनजरें ही मिली थीं अपनी मुलाकात में ,चेहरा भी देखता अगर तू बेनकाब होती” विवेक कुमार शर्मा

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6 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 01/12/2016
    • vivekbijnori 01/12/2016
      • निवातियाँ डी. के. 01/12/2016
  2. Shishir "Madhukar" 02/12/2016
  3. babucm 02/12/2016
  4. mani 02/12/2016

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