४७. अगर दिल महोब्बत में…………….. नही होता |गीत| “मनोज कुमार”

अगर दिल महोब्बत में डूबा ना होतारोता ना दिल दिलबर झूठा ना होताकरता ना भूल ना जुदा तुमसे होताना थे नसीब में एतबार नही होताअगर दिल महोब्बत में………………………… नही होतालाख जतन कर तुमको तो पाया थाकर गये दुखी ख़ुशी तुमपे लुटाया थाआत्मा का हिस्सा थे ये समझा होताजाओगे भटक ये विश्वास नही होताअगर दिल महोब्बत में………………………… नही होताकर गये बीमार हमें आशिकी से अपनीदवा भी नही ना इलाज इसका सजनीवफ़ा की उम्मीद तोड़ी ऐसा नही होताउनको ख़ुशी दे रब गिला नही होताअगर दिल महोब्बत में………………………… नही होताकह जाते एक बार पीछा नही करनाभूल जाना तुम ऐसी दुआ रब से करनाजाता जमाना गुजर याद नही होताहमको कसम है मन उदास नही होताअगर दिल महोब्बत में………………………… नही होताप्यार की महक दिल से आती ही रहेगीजहाँ तुम जाओगी करीब मुझे पाओगीतेरे अब वादों से ये दिल नही पिघलताजब तक तुझे ना देखूँ दिन नही निकलता“मनोज कुमार”

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6 Comments

  1. babucm 01/12/2016
    • MANOJ KUMAR 20/05/2017
  2. Madhu tiwari 01/12/2016
    • MANOJ KUMAR 20/05/2017
  3. निवातियाँ डी. के. 01/12/2016
    • MANOJ KUMAR 20/05/2017

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