बीते बारह माह

20161130222139ex कुहासे की रजाई ओढे़ चुपके से निकालता है दिनकर चहलकदमी करके लौट जाता काश यादों को लौटने का भी हुनर सीखा जाती तू ऐ जनवरी -सुर्ख फूलों की फुलवारी वेलेन्टाइन डे की खुमारी बच्चों की हंसी की खुशबूतेरी याद सी मासूम …ये फरवरी-धरती ने ओढी़ पीली चूनरलगाई अमराइयों का इत्रऔर तेरी यादों का काला काजल…ये रगों मे रगां मार्च -झर झर झराती स्मृतियाँ रिक्त हो पड़े नैन कोटरनये भेश में ले आर्इ है करने का आंख मिचौली खेलयादों का इंतजार बनकर…ये अप्रैल _झुलसती गर्मी के हाथ थामरात तक बचा ही लेता हूंआंख की नमी…तुम्हारी कमी….बीत ही जाती ये मर्इ-गुलमोहर और अमलताषकुदरत के दो रंग, दो रागतीसरी तुम्हारी यादों मे बसीतन्हाई सून ले आया ये जून-मेघ मल्लाह बूंदों की झमाझम मोहब्बत का रागऔर तुम्हारे नाम सेजुड़कर पूरी होती कलाई..विरह प्रणय ये जुलार्इ-प्रीत की किनारी पर बंधेदिन… रात…मेरी स्मृतियाँ को छूकर जातीतुम्हारे कदमों की आहट से मस्तबीतता अगस्त-निलाभ नभ पर ख्वाहिशों की परछांर्इरात के माथे पर उगते चांद की तरहजैसे तूने जोर से फूंका हो रात को…मेरे जिस्म के अन्दर तेरे शुरूरु मे बीतता ये सितंबर-वक्त की साख से उतरकरकंधे पर आ बैठे सारे मौसम…समा जाने को, तेरे मेरे भीतरकही जेहन के अन्दरजिसे देख शर्माता ये अक्टूबर-न जाने कितने रगं बदलता है ये दिनशाम सजती है दियों के उजास से मेरीदुल्हन की तरह तुझसे तेरा जिक्र करता है मुझमेउजास ए मानिंद ये समन्दरकरिश्मे क्या-क्या होते है…बीतते नवंबर _होठों के नर्म लिहाफ ओर बेइंतहा महकते गुलजार के कलामों को बनाकर सिरहाना… धूप में बैठकर सुनता हूंतेरे कदमों की आहट….खनखनाती सुन्दरबीतते दिसंबर कपिल जैन

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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 01/12/2016
  2. C.M. Sharma babucm 01/12/2016
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 01/12/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 01/12/2016

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