माई तेरा घर भी पीहर होता।।(एक अजन्मी कन्या के बोल माँ के लिये…)- मधु तिवारी

गर मुझको दुनिया में लातीमाई तेरा घर भी पीहर होता तेरे घर को मै सदा सजाती तेरा आँगन भी चमक न खोताराखी का दिन उत्सव होताभाई न खोजा करता बहनाकभी किसी का दिल न दुखाती माना करती सबका कहना घर में सदा खुशहाली रहती किसी का दिल कभी न रोता गर मुझको…. हरदम मैं ये कोशिश करती घर में हो खुशियों की लड़ी पर सब के संग सदा ही रहती जब हो जाती दुःख की घड़ीअलग न करती कोख से मुझको तेरा मन भी कोई बोझ न ढोता गर मुझको…..भैया बसे परदेश ओ बाबुल कौन तेरे नैनों को पोंछे किसे सुनाये मैय्या दुखड़ारुकते नहीं है आंसू रोके मैय्या न रोती मैं रहती तो बाबुल ऐसे दुखी न होता गर मुझको….

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13 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 29/11/2016
  2. ANU MAHESHWARI 29/11/2016
  3. Shishir "Madhukar" 29/11/2016
  4. mani 29/11/2016
  5. vijay kumar Singh 29/11/2016
  6. babucm 29/11/2016
    • Madhu tiwari 29/11/2016
    • Madhu tiwari 29/11/2016

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