हंगामा (विवेक बिजनोरी)

मैं खुद को उसके पहलू में छिपाता हूँ तो हंगामा,मैं कुछ पल साथ जो उसके बिताता हूँ तो हंगामानहीं मालुम के कमबख्त जमाना चाहता क्या है,दर्द उसकी जुदाई का दिखता हूँ तो हंगामामैं दर्द-ऐ-दिल को जो दिल में दबाता हूँ तो हंगामा,मैं रो के खुद की पलकों को भिगाता हूँ तो हंगामासमझ आता नहीं ये खेल जो भाई है ज़माने का,मैं राज-ऐ-दिल जो तुम सबको बताता हूँ तो हंगामाविवेक कुमार शर्मा

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12 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 25/11/2016
    • vivekbijnori 28/11/2016
  2. ANU MAHESHWARI 25/11/2016
    • vivekbijnori 28/11/2016
  3. Shishir "Madhukar" 26/11/2016
    • vivekbijnori 28/11/2016
  4. kiran kapur gulati 26/11/2016
    • vivekbijnori 28/11/2016
  5. babucm 26/11/2016
    • vivekbijnori 28/11/2016
    • vivekbijnori 28/11/2016

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