रुको, ज़रा ठहरो और सोचो – अनु महेश्वरी

हमेशा क्यों हड़बड़ी में रहते तुम,अपना बचपन याद करो ज़रा,एक ही बात बार बार पूछी होगी तुमने,माता-पिता बार बार खुश होकर जवाब दिए होंगे,आज तुम्हे दोबारा क्या पूछ लिए,तुम शिकायत करने लगे,बचपन में कभी जिनका हाथ,तुम छोड़ना ही नहीं चाहते थे,आज उनका हाथ थामने में,तुम्हे परेशानी होने लगी,रुको, ज़रा ठहरो और सोचो ….. “अनु महेश्वरी”चेन्नई

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18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 24/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 24/11/2016
  2. Meena Bhardwaj 24/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 24/11/2016
  3. Markand Dave 24/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 24/11/2016
  4. babucm 24/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 24/11/2016
  5. Manjusha 24/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 24/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 24/11/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 24/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 24/11/2016
  7. mani 24/11/2016
  8. ANU MAHESHWARI 24/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 30/11/2016

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