नकाब—मुक्तक—डी. के. निवातियाँ

अच्छा हो,या बुरा, सही गलत का कौन यहां  जिम्मेदार हैजिस रहबर का उठाओ नकाब दीखता वो ही गुनेहगार हैव्यस्त है सभी के सभी अपने नुक्स सवारने – तरासने मेंहै गर जज्बा तो भर हुंकार दुःख-दर्द में कौन हिस्सेदार है !!!!!डी. के. निवातियाँ [email protected]@@

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14 Comments

    • निवातियाँ डी. के. 25/11/2016
  1. mani 22/11/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/11/2016
  2. Meena Bhardwaj 22/11/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/11/2016
  3. ANU MAHESHWARI 22/11/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/11/2016
  4. Shishir "Madhukar" 22/11/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/11/2016
  5. kiran kapur gulati 22/11/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/11/2016
  6. babucm 23/11/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/11/2016

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