चुप चाप चले आओ

कुछ पल के लिए ही सहीतुम मेरे साथ चले आओझूमते हुए  मस्त नज़ारों  मेंबस चुप चाप चले आओसमायी है कण कण  में जोउस ताक़त को ज़रा निरखने दोक़ुदरत ने लुटाये हैं ख़ज़ाने  जोउन्हें समझने और परखने दोचुप बैठा है कहीं कारीगर कोईकाशीदगि उसकी दिल में उतरने दोहर रूप रेखा है  तस्सवुर  उसकामज़ा वादियों ,में उनका लेने दोकुछ पल के लिए ही सहीबस चुप चाप तुम चले आओ है बहुत जो देख कर भी देखा नहींजान कर भी कभी जाना नहींपंछी करते कलरव नील गगन मेंस्वर लहरियों में उनकी खोने दोदेखा है तितलियों को उड़ते हुएएहसास हलकेपन का जग जाने दोफूलों से वाक़िफ़ हम हैं लेकिनख़ुशबू के राज़ को समझने दो देनेवाले ने दी हैं नेमतें बेशुमारउनकी हस्ती को कभी जाना ही नहींदेख कर भी कभी सोचा नहींबनानेवाले को भी पहचाना नहीं नियम  क़ुदरत हैं एक लेकिनहै अंतर तो बस समय काक्षण मिले हैं किसी को कुछ ज़्यादाऔर किसी को कुछ कमहै नियति बस कुछ ऐसी हीआना ,संवरना ,और ख़ाक हो जानापनप  इस मिट्टी से मिट्टी हो जानायही है कहानी ,छोटी सी  ज़िंदगानीमानो  इक धार का बहता पानीकुछ पल के लिए ही सहीइस धार में बह जाने दोजाती मस्त बहारों मेंलुत्फ़ नज़ारों का उठाने दोना सोचो कुछ चले आओमिले हैं अनमोल पल जो,हंस के कट जाने दो      

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

16 Comments

  1. babucm 22/11/2016
  2. Shishir "Madhukar" 22/11/2016
    • kiran kapur gulati 22/11/2016
  3. kiran kapur gulati 22/11/2016
  4. ANU MAHESHWARI 22/11/2016
    • kiran kapur gulati 22/11/2016
    • kiran kapur gulati 22/11/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 22/11/2016
    • kiran kapur gulati 22/11/2016
    • kiran kapur gulati 22/11/2016
  6. mani 22/11/2016
    • kiran kapur gulati 22/11/2016
  7. kiran kapur gulati 22/11/2016
  8. Meena Bhardwaj 23/11/2016
    • Kiran kapur Gulati 01/09/2017

Leave a Reply