वरना लोगों का मुहब्बत से:अनन्य

**”वरना लोगों का मुहब्बत से ऐतबार चला जायेगा”** जिस दिन तेरी महफ़िल से ये खुद्दार चला जायेगा,उसी दिन ये सारा रौनक-ए-मय्यार चला जायेगा l तू बेशक कत्ल कर मेरा मगर चुपके से चला जा,वरना लोगों का मुहब्बत से ऐतबार चला जायेगा l बस मेरी लाश के गिरने तलक तमाशा है,फ़िर देखना कि कैसे ये बाज़ार चला जायेगा l तू तो तेरी सहूलियत के मुताबिक ही इश्क करता है,मेरी सहूलियत पे मुझको मार, ये गुबार चला जायेगा l थोड़ा सा वफाओं का ज़हर भी मिला दे इसमें,वरना ये तीर तेरा यूं ही बेकार चला जायेगा l एक लम्हा ही सही कभी मेरी तरह इश्क तो कर,उम्रभर के लिये तेरा ये करार चला जायेगा l खैर ! तेरी भी मजबूरी है जख्म देते रहना,वरना तेरा मरहम का कारोबार चला जायेगा l मेरी कश्ती को मेरे सीने में डुबा फ़िर देख “ऐ सागर”,तेरी मौजों से तेरे तूफां का सारा भार चला जायेगा ll               -Er Anand Sagar Pandey,”अनन्य”

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3 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 19/11/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 19/11/2016

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