इक सुंदर कविता…,क्या होती

इक सुंदर कविता…,क्या होतीकवि के भावों को, शब्दों में है पिरोतीकुछ तीखी, कुछ नटखटशोर-सरावा, झटपटकुछ आशाएँ, कुछ उम्मीदेंरिश्तें-वादों की रशीदेंअनेकों हुए कवि, अनगिनत कविताशब्द कम पढ़ते नहीं, हर रोज़.., इक नई कविताकई…विख्यात हुए, कई… रह गए गुमनामकुछ आशिक हुए, कुछ हुए बदनामकुछ को मंच मिला, कुछ को मिला पुरुष्कारन जाने कितने हुए, जिनको मिला तिरष्कारलिखना किसी ने न छोड़ा, चाहे मिला हो जो रंगइक कवि को, कागज़-कलम-स्याही का, मिलन ही होता सतसंगइसीलिए कवि की कविता, बहुत इतराती हैकुछ को हंसती तो कुछ को रुलाती हैकुछ को किसी अपने की, याद दिलाती हैशब्द-रचना में रचकर, इक कवि की कविता… अमर हो जाती हैइक सुंदर कविता यही कहलाती हैइक सुंदर कविता यही कहलाती हैभागचन्द अहिरवार “निराला” 

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

4 Comments

  1. vvk 18/11/2016
    • Bhagchand Ahirwar Bhagcahnd 10/06/2017
  2. C.M. Sharma babucm 19/11/2016

Leave a Reply