तेरे अक्स – शिशिर मधुकर

कहने को कितने हँसी चेहरे नज़र में आते हैंमगर हमें तो वो सब तेरे अक्स ही दिखाते हैकोई यूँ ही ना किसी के मन में समा जाता हैबिछडी हुई तन्हा रूहों के ये सब तो नाते हैंजिस पेड़ की शाखो में कोई चिंता ही ना हो परिंदे भी अक्सर वहाँ पे अपने घर बनाते हैंज़माने के नियम मान उनसे बातें भी ना हो आँख लगती हैं तो ख्वाबों में वो ही आते हैंचाहे कितना भी दर्द सहना पड़े मुझे मधुकरअपने सब वादे हम चुप रहकर भी निभाते हैं.शिशिर मधुकर

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12 Comments

  1. Dr Swati Gupta 18/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/11/2016
  2. ANU MAHESHWARI 18/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/11/2016
  3. Manjusha 18/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/11/2016
  4. babucm 19/11/2016
  5. Shishir "Madhukar" 19/11/2016
  6. Meena Bhardwaj 22/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 22/11/2016

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