नियती – शिशिर मधुकर

काल चक्र ने देखो तो मुझ पर ये कैसा वार कियामेरी सब खुशियाँ छीनी सूना मन का संसार किया ना प्रेम मिला ना मान मिला केवल घर वीरान मिलाअपने लोगों ने गैरों सा मुझसे नीरस व्यवहार कियाजितना भी बस में था मेरे लोगों को सहयोग दिया मगर समय ने जाने क्यों मेरे संग ना उपकार कियाकिससे कहें जीवन में अब कुछ ऐसे पल वाबस्ता हैं पैरों को बाँधा है जिनने और चलने से लाचार कियामधुकर कुछ भी कर ले इंसा पर जान ले वो ये सच्चाई उस राह ही जाना पड़ता है जो नियती ने तैयार कियाशिशिर मधुकर

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10 Comments

  1. Manjusha 17/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/11/2016
  2. ANU MAHESHWARI 18/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/11/2016
  3. babucm 18/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/11/2016
  4. Dr Swati Gupta 18/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 18/11/2016

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