प्रणय की आस के दीये – शिशिर मधुकर

मेरे सीने में धड़कन है तन्हा कटती है सब रातें मैं भूला नही खुशबू और वो तेरी मलमली बातें ये मेरी कमी है जो मैं तेरी उलफत को तकता हूँकई काँटे हैं राहों में मगर फ़िर भी ना थकता हूँ प्रणय की आस के दीये मगर जो तुम बूझाओगीमेरे नाजुक से मन को जान लो इतना दुखाओगी किसी को प्रेम अपना फ़िर कभी मैं दें ना पाऊँगा कोई रो कर बुलायेगा तब भी वापस ना आऊँगामेरी तुमसे ये विनती है मुझे बाँहों में तुम भर लोकभी भी साथ ना छोडेंगे बस वादा यही कर लोशिशिर मधुकर

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8 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 16/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 16/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 16/11/2016
  2. Manjusha 16/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 16/11/2016
  3. babucm 17/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 17/11/2016

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