ऐ “माँ”…….

ऐ “माँ”तू लौट आ,फिर से अपने,आँचल में सुला,दे आवाज़,फिर से बुला,तेरे हाथो की रोटियां,पास अंगीठी के, बिठा के खिला,ढूध कोई, बहाना बना पिला,चल फिर कोई,परियो का किस्सा सुना,कोई मीठा सा गीत,फिर आज गुनगुना,नरम नरम हाथो से,मेरे गालो पर मार लगा,गालो को चुम, सुबह-सुबह मुझे जगा,ऐ “माँ”, तू जहाँ भी है, जल्दी से मेरे पास आ,टूट जायेगा “मनी”,दुनिया की चालाकियों से,बस तू अपने, आँचल में आ के छुपा,,मनिंदर सिंह “मनी”

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14 Comments

  1. डॉ. विवेक 15/11/2016
    • mani 16/11/2016
  2. Shashank Hirkaney 15/11/2016
    • mani 16/11/2016
  3. babucm 15/11/2016
    • mani 16/11/2016
  4. Shishir "Madhukar" 16/11/2016
    • mani 16/11/2016
  5. Dr Swati Gupta 16/11/2016
    • mani 16/11/2016
    • mani 21/11/2016
  6. Meena Bhardwaj 22/11/2016
    • mani 23/11/2016

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