अधूरा – शिशिर मधुकर

अपना स्त्रीत्व मुझे दें दो मैं अपना पुरुषत्व तुम्हें दूँगा गर तुम सीमाएँ तोडोगी तो मैं भी तुम संग न बोलुँगाक्या तुमको ये मालूम नहीँ मैं तुम बिन सदा अधूरा हूँ जब जब तुम ढल जाती हो मुझमें हो जाता मैं पूरा हूँमेरी तुमसे अर्ज यही है बस मुझ पर ये उपकार करोअपने नारीत्व की वर्षा के द्वारा मेरा तुम उद्धार करोशिशिर मधुकर

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10 Comments

    • Shishir "Madhukar" 14/11/2016
  1. babucm 14/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 14/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 15/11/2016
  2. mani 15/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 15/11/2016
  3. Dr Swati Gupta 15/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 15/11/2016

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