जिन्दगी में

जिन्दगी में,बहुत कुछ खोया है,बहुत कुछ पाया हैबेहिसाब..,किसी ने रुलाया हैकोशिश भी की उनको भुलाने कीइबादत में..,हर बार उन्हीं का नाम आया है  खुदा ने कहा, तूँ! कर रहा है इबादत, उसे भुलाने कीया है अजमाईस, अब भी, उसको पाने कीमाना,इश्क ही इबादत हैतूँ! जर्रे-जर्रे से न बाखिफ़ है भुला दे तूँ, उसे! इसी में, तेरी भलाई हैअब तेरे इंतिहाँ की , घड़ी आई है”भागचन्द अहिरवार”

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4 Comments

  1. babucm 12/11/2016
    • Bhagchand Ahirwar 15/11/2016
  2. Dr Swati Gupta 13/11/2016
    • Bhagchand Ahirwar 15/11/2016

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