बचपन ….-पियुष राज

बचपन

Bachpan

बचपनवो भी क्या वक़्त थाजब ना थी कोई परेशानीऔर ना था कोई टेंशनखुले आसमान में पंछी की तरहउड़ता था मेरा मनकितना सुंदर था वो बचपनदिन भर खेल-कूदहर वक़्त शरारतफिर भी नही थकता था तनकितना सुन्दर था वो बचपनन था ऊंच-नीच का ज्ञानन था किसी चीज़ का अभिमानछल-कपट से दूर था मनकितना सुंदर था वो बचपनघर के बाहर दोस्त-यारघर में मम्मी-पापा का प्यारसबके साथ मिलकरलगता था अपनापनकितना सुंदर था बचपनजिंदगी की सुनहरी यादेहोती है बचपनफिर से उस पल को जीने काकरता है सबका मनकाश ! फिर से लौट आए वो बचपनपियुष राज ,दुधानी ,दुमका ।(Poem.No-34) 11/11/2016Mob_9771692835

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5 Comments

  1. mani 11/11/2016
  2. Dr Swati Gupta 11/11/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 11/11/2016
  4. babucm 11/11/2016

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