मैं इंसान बन रहीं हूँ

जिम्मेदारियों से निपट कर ,मैं इंसान बन रहीं हूँ ,जैसी जीने की थी चाहत ,अब बिंदास जी रही हूँ।ख्वाहिश थी ये पुरानी ,पर चली न मेरी मनमानी ,कुछ काम का था चक्कर ,कुछ महँगाई से थी टक्कर।सारे आदर्श लुढ़क गए थे ,हम राह भटक चुके थे ,वर्षों की खोई अपनी ,पहचान बन रही हूँ।जिम्मेदारियों से निपट कर ,मैं इंसान बन रहीं हूँ ,जैसी जीने की थी चाहत ,अब बिंदास जी रही हूँ।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/11/2016
    • Manjusha Manjusha 10/11/2016
  2. C.M. Sharma babucm 10/11/2016
    • Manjusha Manjusha 11/11/2016
  3. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 11/11/2016
    • Manjusha Manjusha 11/11/2016

Leave a Reply