फिर वही एहसास…

मुद्दत के बाद आज वो एहसास पाया है,

खोया था कोई जिसको आसपास पाया है।

रुक्सत हुई थी ख़ुशी कभी मेरी जिंदगी से,

सदियों के बाद फिर से खुद को ख़ास पाया है।

मुद्दत के बाद आज वो एहसास पाया है,

खोया था कोई जिसको आसपास पाया है।

आज शहर-ए-मोहोब्बत में हमने फिर से रखे कदम,

आज फिर उसी हंसी चेहरे पे फ़िदा हैं हम।

वो भी आज देखके मुझे फिर से मुस्कराया है..

मुद्दत के बाद आज वो एहसास पाया है,

खोया था कोई जिसको आसपास पाया है।

रूबरू हुए हैं अपने प्यार से अभी,

आया ये जो लम्हा ना निकले हाथ से कभी।

अरसे के बाद उसने सीने से लगाया है..

मुद्दत के बाद आज वो एहसास पाया है,

खोया था कोई जिसको आस पास पाया है।।

विवेक कुमार शर्मा

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8 Comments

    • vivekbijnori 10/11/2016
  1. MANOJ KUMAR 10/11/2016
    • vivekbijnori 10/11/2016
  2. babucm 10/11/2016
    • vivekbijnori 11/11/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 10/11/2016
    • vivekbijnori 11/11/2016

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