झूठ हँस रहा था – शिशिर मधुकर

ऐ वक्त मेरे अपमान का तूने पूरा सिला दियाअभिमानी का सब घमंड माटी में मिला दियाजो बन गए थे खुदा बस किस्मत के करम सेवो कुछ नहीँ उनको भी ये अहसा दिला दियाचंद सिक्कों के शोर में जो गरिमा सभी भूलेंउनके घरों में भी घने बबूलो को खिला दियाकोई नहीँ थी आस फ़िर भी बारिश हुई ऐसी सभी प्यासे परिंदों को खूब पानी पिला दियामुद्दत से झूठ हँस रहा था खिल्ली सा उडाता तूने सच का दे साथ उसे फ़िर से जिला दिया.शिशिर मधुकर

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18 Comments

  1. mani 09/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/11/2016
  2. babucm 09/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/11/2016
  3. ANU MAHESHWARI 09/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/11/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 09/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/11/2016
  5. Dr Swati Gupta 09/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/11/2016
  6. MANOJ KUMAR 10/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/11/2016
  7. Meena Bhardwaj 10/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/11/2016
  8. Manjusha 10/11/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/11/2016

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