आदत हो गयी है..

तुम को मुबारक हो खुशियाँ तुम्हारी,हमे तो गम की आदत हो गयी है,न जलाओ उम्मीदों के दीये इस तरह,अँधेरे में रहने की आदत हो गयी है,न कुरेदो उन जख्मों को फिर से आज,हमे तो उन्हें छिपाने की आदत हो गयी है,न भीगने दो इन आँखों को आँसुओं से,इन्हें खुश्क रहने की आदत हो गयी है,सिले रहने दो इन होठों को यूँ ही,इन्हें चुप रहने की आदत हो गयी है,लगी है आग इस दिल में दुखों की,हँसी से बुझाने की आदत हो गयी है।।By:Dr Swati Gupta

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10 Comments

  1. mani 07/11/2016
    • Dr Swati Gupta 07/11/2016
  2. Shishir "Madhukar" 07/11/2016
    • Dr Swati Gupta 07/11/2016
  3. babucm 07/11/2016
    • Dr Swati Gupta 07/11/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 07/11/2016
    • Dr Swati Gupta 07/11/2016
  5. MANOJ KUMAR 10/11/2016

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