४४. तुमसे मिलता…… संसार सनम |गीत| “मनोज कुमार”

तुमसे मिलता है अपनापन तुमसे महके मेरा घर आँगन तुमसे ही हैं जज्बात सनम तुम साँस मेरी संसार सनम तुमसे मिलता……………………… संसार सनमअंजाम मेरा मेरी भोर हो तुमभूलूँ ना कभी वो ग़ज़ल हो तुम है व्याकुल मन कर दो ना करमआ गले लगो रूठो ना सनम तुमसे मिलता……………………… संसार सनमबेपनाह करूँ में प्यार तुम्हें हैं फूल से सुन्दर अधर तेरे सरगम की तरह भा गई हो तुम कभी दर्द हो गहरी ख़ुशी हो तुम तुमसे मिलता……………………… संसार सनमहै लवों पे तेरा प्यार सजनछिप जाने दो आफताब सजन परछाईं से भी है प्यार सनम कर रही है रैन इंतजार सनम “मनोज कुमार”

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16 Comments

  1. Dr Swati Gupta 06/11/2016
    • MANOJ KUMAR 10/11/2016
  2. mani 06/11/2016
    • MANOJ KUMAR 10/11/2016
  3. Shishir "Madhukar" 06/11/2016
    • MANOJ KUMAR 10/11/2016
  4. babucm 06/11/2016
    • MANOJ KUMAR 10/11/2016
  5. डॉ. विवेक 06/11/2016
    • MANOJ KUMAR 10/11/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 07/11/2016
    • MANOJ KUMAR 10/11/2016
  7. Mital 08/11/2016
    • MANOJ KUMAR 20/05/2017
    • MANOJ KUMAR 10/11/2016

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