सरहद

जमीन पर एक लकीर खीचीइन्सान चले अपने-अपने ओरएक ने कहा पाक जमीनदुसरे ने कहा भारत महानबैर दोनों ने पालाकुछ खास लोगो ने कभीनफरत की आग को बुझने नहीं दियाजमीन पर खीची लकीर पर हियासत चलती रहीकुछ परिवार लकीर के साथ रहते हैदेखा है उन्होंनेनफरत का अंजामबंदूक से चली गोली ने धर्म, बच्चे और बड़ेका फर्क ना जानाबस अपना काम कर गईघर दोनों तरफ उजड़ेबच्चो की रोने की आवाज़एक जैसी लगती हैभूखे पेट और उजड़े खेत एक जैसे ही देखते हैजमीन पर खीची लकीर आज आग उगल रहीRinki

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16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 04/11/2016
  2. MANOJ KUMAR 04/11/2016
  3. jain 04/11/2016
  4. babucm 04/11/2016
  5. mani 05/11/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 05/11/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 05/11/2016
  8. Dr Swati Gupta 06/11/2016

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