इक्कीसवी सदी -कचरे में रोटी ढूंढते हाथ – अनु महेश्वरी

कचरे से रोटी उठाते बच्चे को देख,मेरी आँखें शर्म से झुक गई।उसने जब मेरी ओर देखा,मैं उससे नज़रें मिला न सकी।पास की दुकान से,बिस्कुट खरीद बच्चे को दे,लौटते वक्त सोचने लगी,क्या इक्कीसवी सदी में,इसी भारत का सपना देखा था?कहाँ असफल हम रहे,क्या गल्तियां हुई हमसे?आज भी कुछ मासूम,जिन्हें स्कूल में होना था,काम करते पाए जाते।मजबूर हो भूख से,रोटी चुगते कचरे में।आशावादी हूँ, इसलिए सोचती हूँ,अब भी देर नहीं हुई,सब मिल हाथ बढ़ाये हम,तस्वीर बदलने भारत की,एकजुट हो जाए हम।”अनु महेश्वरी “चेन्नई

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19 Comments

  1. डॉ. विवेक 04/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 04/11/2016
  2. Rinki Raut 04/11/2016
  3. ANU MAHESHWARI 04/11/2016
  4. Shishir "Madhukar" 04/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 04/11/2016
  5. MANOJ KUMAR 04/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 04/11/2016
  6. babucm 04/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 05/11/2016
  7. mani 05/11/2016
    • Anu Maheshwari 05/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 05/11/2016
  8. निवातियाँ डी. के. 05/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 05/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 05/11/2016
  9. Dr Swati Gupta 06/11/2016
    • ANU MAHESHWARI 06/11/2016

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