उफ़ ये दोराहें

उफ़ ये दोराहें


हम इन्सानों की अजीब कहानी हैदस कदम चले नहीं किबस दोराहें आनी हैंएक राह अपनानी हैतो दूजी छूट जानी हैजिस राह को चुन चल पड़ेवो लगती नहीं सुहानी हैजो राह छूट गयी हैबस उसपे पछतानी हैबस ऐसी ही अजीब सीमेरी भी कहानी हैजो हाथ मेरे आता हैवो मुझको भाता नहींजो हाथ से छूट जाता हैउसपे मन पछताता हैकोई तो हो इस उलझन का उपायदो राहों की ये गुत्थी सुलझ जाएकोई इन दोनों राहों से कह देवो हमसे मिलने बारी-बारी से आयें

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8 Comments

  1. विवेक गुप्ता 03/11/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 03/11/2016
  3. babucm 03/11/2016
  4. Shishir "Madhukar" 04/11/2016
  5. MANOJ KUMAR 04/11/2016

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